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हमेशा सफ़ल लोगों की ही सलाह मानें


सलाह यानि एडवाइस हमारी ज़िन्दगी में जितनी महत्वपूर्ण होती है, ये उतनी ही सस्ती भी होती है।जी हाँ, जैसा कि आप सभी जानते हैं की किसी भी व्यक्ति से सलाह लेना या उसे सलाह देना एक बहुत ही आसान काम है लेकिन क्या आप ये जानते हैं की सलाह देना सभी के लिये आसान काम क्यों है ?क्यूंकि किसी भी काम में असफल होना कोई मुश्किल काम नहीं है। अर्थात, लोग जिस तरह से सलाह लेते हैं वही उनकी असफलता का सबसे बड़ा कारण होता है।

“किसी भी काम को करने के लियें सलाह हमेशा ऐसे व्यक्ति से ही लें, जो उस काम को करने में माहिर हो।”

यहाँ पर हम बात करेंगे सलाह लेने की। क्योंकि अगर हम किसी भी काम में सफ़ल होना चाहते हैं तो हमें उस काम को करने के लिये एक अच्छी सलाह की ज़रुरत होती है।

कौन सही सलाह दे सकता है ?

मान लेते हैं की आप एक प्राइवेट या सरकारी नौकरी करके अपनी सभी ज़रूरतें पूरी करते हैं। लेकिन आप चाहते हैं की आपकी ज़रूरतों के साथ-साथ आपके सपने भी पूरे होने चाहियें। आप अपने परिवार को एक ऐसी ज़िन्दगी देना चाहते हैं जिसमे उन्हें वो सभी सुविधाएं मिलें जो आप सिर्फ सोच ही सकते हो। उन्हें हक़ीक़त में बदलने के लिये आपके पास कोई ज़रिया नहीं है।


अब आपकी मुलाक़ात अपने एक पुराने दोस्त से होती है। आपको पता लगता है की आपका दोस्त किसी बिज़नेस को चलाता है जिससे उसे बहुत अच्छी आमदनी होती है। इतनी आमदनी जिसकी आप अपनी नौकरी से उम्मीद नहीं कर सकते। आपका दोस्त आपको सलाह देता है की आपको भी उसके साथ मिलकर ये बिज़नेस करना चाहिए। आपके पूछने पर वह आपको बताता है की इस बिज़नेस को करने के लिये आपको ज़्यादा पैसा लगाने की ज़रुरत नहीं है और ना ही आपको इसे करने से पहले इसमें एक्सपर्ट होना पड़ता है। आप उत्साहित हो जाते हैं और आपको लगने लगता है की अब आप अपने उन सभी सपनों को पूरा कर सकते हैं जिन्हें पूरा करने के लिये आपके पास अभी तक कोई ज़रिया नहीं था। आप अपने इस दोस्त के साथ बिज़नेस करने के लिये तैयार हो जाते हैं। इसके बाद आपका दोस्त आपसे विदा लेता है और जल्द ही आपसे मुलाक़ात की उम्मीद रखता है। आप भी उसे जल्दी ही मिलने का वादा करते हो। आप अपने घर जाते हो और आपके गलती करने का समय अब शुरू होता है। जी हाँ, यहाँ पर अब खेल शुरू होता है सलाह मानने का। आप सबसे पहले ख़ुशी-ख़ुशी अपने माता पिता को यह बात बताते हो की आज आपकी मुलाक़ात आपके एक पुराने दोस्त से हुयी जो की एक बिज़नेस चलता है जिस से उसे बहुत अच्छी आमदनी होती है। इतनी आमदनी जितनी हम नौकरी से कभी उम्मीद भी नहीं कर सकते और ख़ुशी की बात यह है की वह मुझे भी अपने बिज़नेस में शामिल करना चाहता है। यहाँ आपके माता-पिता अपनी उम्र के हिसाब से तजुर्बा जताते हुए आपसे कहते हैं की आपको इस तरह किसी की बात का विश्वास नहीं करना चाहिए। अगर पैसे कमाना इतना ही आसान होता तो सभी इतनी आसानी से पैसे कमा लेते। फिर वो आपको बताते हैं की उनके किसी मित्र के बेटे ने भी अपने किसी दोस्त के साथ कुछ बिज़नेस शुरू किया था जिसमे उसके दोस्त ने उसे धोखा दिया और अब उसे बिज़नेस छोड़कर नौकरी करनी पड़ रही है। तुम्हारी ज़िन्दगी अच्छी भली तो चल रही है, गुज़ारा भी ठीक-ठाक हो रहा है। तुम्हें ऐसे किसी चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए।



आपको बात तो कुछ समझ आ जाती है लेकिन फिर भी आपके मन में कुछ डाउट रहता है। अब अगले दिन आप अपने कुछ दोस्तों से मिलते हो जिनके साथ आपका रोज़ उठना-बैठना है। आप उन्हें पूरी बात बताते हो और पूछते हो की मुझे क्या करना चाहिए। आपके दोस्तों में से एक कहता है की जिस बिज़नेस के बारे में आप बात कर रहे हो, वो इस तरह का बिज़नेस पिछले कुछ बरस पहले कर चुका है और आपको इसे बिलकुल नहीं करना चाहिए क्यूंकि वह खुद भी इस बिज़नेस में असफल हो गया था। अब आपका दिमाग़ एकदम साफ़ हो जाता है और आपको पता चल चुका होता है की आपको क्या करना है।कुछ दिनों बाद आपका दोस्त आपको फ़ोन करके पूछता है कि आपने उसे कोई रिस्पांस नहीं दिया। आप कहीं इधर-उधर व्यस्त रहने का बहाने करके उसे बोलते हो की जब वक़्त मिलेगा तो आप ज़रूर उससे मिलोगे लेकिन आप कभी उससे मिलने नहीं जाते। इस तरह वक़्त गुज़रता रहता है और आपकी ज़िन्दगी जैसी चल रही थी, वैसी ही चलती रहती है। आइये जानते हैं कि आपने कहाँ और क्या गलती की।



- आपके माता-पिता ने आपसे ठीक कहा की ऐसे किसी की बात का विशवास नहीं करना चाहिए। लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आपको किसी की बात का विश्वास ही नहीं करना चाहिए। क्या आप अपने उस दोस्त से बात करके उसके बारे में या उसके बिज़नेस के बारे में अपने डाउट्स क्लियर नहीं कर सकते थे ? - आपके माता-पिता को निश्चित रूप से बहुत तजुर्बा था लेकिन क्या वाक़ई उन्हें उस बिज़नेस के बारे में कोई जानकारी थी या तजुर्बा था जिसकी वजह से उन्होंने आपको यह बिज़नेस ना करने की सलाह दी थी ? - क्या आपके उन सभी दोस्तों को इस बिज़नेस का कोई तजुर्बा था और आपका एक दोस्त उस बिज़नेस में क्यों असफल हो गया था, क्या आपने यह जानने की कोशिश की ? - आपका वह दोस्त अगर इस काम को करने में असफल हो गया था तो क्या यह ज़रूरी था की आप भी इस काम को करने में असफल हो जाते ?(क्या आपको याद है जब आप स्कूल में पढ़ते थे तो हर साल कुछ बच्चे फ़ैल हो जाते थे। अगर कुछ बच्चे फ़ैल हो जाते थे तो आप या दूसरे सभी बच्चे फ़ैल क्यों नहीं होते थे ? जवाब आप जानते हैं। जी हाँ, आप या दूसरे सभी बच्चे इसलियें फ़ैल नहीं होते थे क्यूंकि आप ज़रुरत के हिसाब से पढ़ाई किया करते थे।हो सकता है आपके जिस दोस्त ने उस बिज़नेस को किया था वो उसे सही तरह से न कर सका हो। उसकी कुछ गलतियां रही हों जिसकी वजह के वह सफ़ल नहीं हो सका।) - और अब सबसे ज़रूरी बात ! क्या अपने किसी ऐसे व्यक्ति से सलाह लेने की कोशिश की जो इस बिज़नेस को कर रहा हो और उसमे कामयाब भी हो ? क्या आपने अपने दोस्त से कहा की वह आपको ऐसे लोगों से मिलवाये जो लोग इस बिज़नेस को उसके साथ कर रहे हैं ? नहीं, आपने ऐसा कुछ नहीं किया और ऐसे लोगो की सलाह मानी जिन लोगों को इस बिज़नेस के बारे में कुछ पता ही नहीं था या जो लोग इस बिज़नेस में असफल हो गए थे। हम अपनी लाइफ में ऐसी कितनी ही गलतियां करते हैं जिनकी वजह से अपॉर्च्युनिटी हमारे हाथ से निकल जाती है।



"अगर आपका बच्चा स्कूल में पढ़ता है तो उसका हौंसला बढ़ाने के लियें आप किन बच्चों का उदाहरण देते हो ? जो कम मार्क्स लाते हैं और फ़ैल हो जाते हैं या जो अच्छे मार्क्स लाते हैं और पास हो जाते हैं ? आप हमेशा उन बच्चों का ही उदाहरण देते हो जो अच्छे मार्क्स लाते हैं और पास हो जाते हैं क्यूंकि वो सफल होते हैं।" बताने का मक़सद सिर्फ इतना है की अगर आप किसी काम को लेकर डाउट में हों या उस काम में सफ़ल होना चाहते हों तो सलाह हमेशा ऐसे व्यक्ति से लीजिये जो उस काम को सफलता-पूर्वक कर रहा हो। हो सकता है कुछ लोग उस काम में असफल रहे हों लेकिन आपका मक़सद तो सफ़ल होना है, असफल होना नहीं। इसलियें...

"हमेशा सफ़ल लोगों की ही सलाह मानें।"

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